ज़र्रों मे रहगुजर के चमक छोड़ जाऊँगा,
पहचान अपनी दूर तलक छोड़ जाऊँगा,
खामोशियों की मौत गंवारा नहीं मुझे,
शीशा हूँ टूटकर भी खनक छोड़ जाऊँगा।

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फ़क़ीर मिज़ाज़ हूँ, मै अपना अंदाज़ औरों से जुदा रखती हूँ,
लोग मस्जिदो मे जाते है,
मै अपने दिल मे ख़ुदा रखती हूँ।

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हमने ऊँची हस्तियाँ भी देखीं और घनी बस्तियाँ भी देखीं,
आवारगी भी देखी और कड़ी गिरफ़्तियाँ भी देखीं,
उनसे कहो कि हमे उड़ना न सिखाये ऊँचे असमानों में,
हमने उड़ते जहाज भी देखे और डूबती कस्तियाँ भी देखीं।

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जीता रहा मैं अपनी धुन में,
दुनिया का कायदा नहीं देखा,
रिश्ता निभाया तो दिल से निभाया,
कभी अपना फायदा नहीं देखा।

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बेखुदी की जिंदगी हम जिया नहीं करते,
जाम छीन कर किसी का पिया नहीं करते,
प्यार करना है तो खुद आ के कर वरना,
पीछा हम किसी का किया नहीं करते।

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अंजाम की परवाह होती तो,
हम मोहब्बत करना छोड़ देते,
मोहब्बत में तो जिद्द होती है,
और जिद्द के बड़े पक्के हैं हम।

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इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर,
शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं।

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अपनी शख्शियत की क्या मिसाल दूँ यारों
ना जाने कितने मशहूर हो गये मुझे बदनाम करते करते।

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