बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है,
आप खुश रहें.. मेरा क्या है..
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है!

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कोई खुशियों की चाह में रोया,
कोई दुखों की पनाह में रोया,
अजीब सिलसिला हैं ये ज़िंदगी का..
कोई भरोसे के लिए रोया,
कोई भरोसा कर के रोया!!

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क्या वजह होगी, अब फिर यहां लौट आने की..
इन नुक्कड़ों पे रुकने की, इन गलियों के चक्कर लगाने की..
अब तो ना तू मेरी है, ना ही अब ये शहर मेरा..
ना इच्छा अब कुछ सुनने की और ना ही कुछ बताने की..!!

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कदर कर लो उनकी जो तुमसे,
बिना मतलब की चाहत करते है,
दुनिया मे ख्याल रखने वाले कम,
और तकलीफ देने वाले ज्यादा होते है!

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शायद मैं इसीलिए पीछे हूं,
मुझे होशियारी नही आती,
बेशक लोग ना समझे मेरी वफादारी,
मगर यारो मुझे गद्दारी नही आती।

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तन्हा मौसम है और उदास ‪‎रात‬ है
वो मिल के बिछड़ गये ये ‪‎कैसी मुलाक़ात‬ है,
दिल धड़क तो रहा है मगर ‎आवाज़‬ नही है,
वो धड़कन भी साथ ले गये ‎कितनी अजीब‬ बात है!‬‬‬‬‬‬‬‬

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सिखा दिया दुनिया ने मुझे अपनो पर भी शक करना
मेरी फितरत में तो गैरों पर भी भरोसा करना था!

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बरसात होती हैं आँखों में जब याद तेरी आती हैं
बहुत रोता हैं ये दिल मेरा जब दूर तू जाती हैं |

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