बारिशों का क्या हैं, आजकल तो आँखों से बरसती हैं
तन्हाई में महफ़िल आखिर कहाँ सजा करती हैं
शंमायें भुझती हैं, और परवाने पिघलते हैं….
लोग तो रौशनी के लिए अपना दिल जलाये जाते हैं|

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हसीनो ने हसीन बनकर गुनाह किया,
औरों को तो क्या हमको भी तबाह किया,
पेश किया जब ग़ज़लों में हमने उनकी बेवफ़ाई को,
औरों ने तो क्या उन्होने भी वाह-वाह किया|

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आंसूओ तले मेरे सारे अरमान बह गये
जिनसे उमीद लगाए थे वही बेवफा हो गये,
थी हमे जिन चिरागो से उजाले की चाह,
वो चिराग ना जाने किन अंधेरो में खो गये|

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उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ,
सामने न सही पर आस-पास हूँ,
पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे,
मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ!

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हम मौत को भी जीना सिखा देंगे
बुझी जो शमा तो उसे भी जला देंगे
कसम तेरे प्यार की जिस दिन हम जायेंगे
दुनिया से एक बार तुजे भी रुला देंगे..!!

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दुआ मांगी थी आशियाने की,
चल पड़ी आंधियां ज़माने की,
मेरे गम को कोई समझ न पाया,
मुझे आदत थी मुस्कराने की|

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दर्द होता नहीं दुनिया को दिखाने के लिए,
हर कोई रोता नहीं आँसू बहाने के लिए,
रुठने का मज़ा तो तब आता है,
जब कोई अपना होता है मनाने के लिए!

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जिंदगी सुंदर है पर जीना नही आता,
हर चीज मे नशा है पर पीना नही आता,
सब मेरे बगैर जी सकते है,
बस मुझे ही किसी के बगैर जीना नही आता!

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